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Tobacco Board
Auctions
नीलामी पद्धति

वर्ष 1984 से पहले, एफसीवी तम्बाकू के मार्केटिंग के लिए कोई भी आयोजित पद्धति नहीं थी।  उत्पादक अपने तम्बाकू को खरीददारी स्थल तक ले जाया करते थे, जो व्यक्तिगत तम्बाकू कंपनी द्धारा स्थापित किया हुआ, रहता था और जहाँ खरीददार तम्बाकू का परीक्षण करने के बाद, मूल्य का र्निधारण करते थे।  खरीददार के व्दारा किया गया प्रस्ताव लगभग अंतिम हुआ करता था और उत्पादकों के लिए यह जरूरी होता था कि दरों को या तो स्वीकार करें या फिर, अन्य खरीददार के पास ले जाए, जो साधारणतय अतिरिक्त यातायात मूल्यों के कारण या फिर हाँडलिंग के दौरान हुई हानियों के कारण, नहीं किया जाता था।  अत: उत्पादक को  खरीददार के प्रस्तावित दरों को स्वीकार करने के अलावा अन्य विकल्प कोई नहीं था।  अत: यह निश्चित था कि यह एक असही बाजार पद्धति थी, जिसमें खरीददारों के बीच प्रतिस्पद्र्धा नहीं थी और इस तरह उत्पादक, विशेषकर अत्याधिक फसल के समय अलाभकारी स्थिति में हुआ करता था। प्रारंभिक बाजार की स्थिति, अनियंत्रित बेकानूनी व्यवहारों से पाई गई, जिसमें उत्पादकों को देरी या बिल्कुल भिन्न भुगतान हुआ करता था और कम वजन से तम्बाकू बिक्री के लिए दिया जाता था। इस पद्धति में किसानों के लिए एक मामूली और सही कीमत की आशा बिलकुल नहीं की जा सकती थी ।

बोर्ड ने अनुभव किया कि इस बाजार पद्धति में सभी समस्याओं का मूल कारण नीलामी पद्धति का परिचय है। 1978 में तम्बाकू बोर्ड अधिनियम 1975 का संशोधित किया गया, जिसमें बोर्ड को नीलामी मंच स्थापित करने का अधिकार दिया गया था और इसे नीलाम मंच पर नीलाम के संचालक के रूप में कार्य करने का अधिकार दिया गया था।  (धारा 8 (2) (सी सी))

बोर्ड प्रमुख उत्पादित देशों जौसे संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, जिम्बाबवें में विद्यमान इस नीलामी पद्धति का अययन किया, ताकि एक ऐसी पद्धति का शुरूआत करे, जो भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल होगा और, जो जिंबॉबवें मोडल पद्धति के नक्शों पर आधारित होगा।  यों तो भारतीय नीलामी पद्धति, जिंबॉबवे मॉडल के बाद ही स्थापित हुआ फिर भी यह अपने आप में एक विशेषता रखती है, चूँकि यह विश्व के अनेक नीलामी पद्धतियों की मुख्य विशेषताओं का सम्मिश्रण है, जिसमें भारतीय तम्बाकू उत्पादकों और व्यापारियों के वास्तविक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितयों का, एक पद्धति से सामना करने की तरीकों को बताया गया है ।

कर्नाटका ( मौसूर ) में वर्ष 1984 के मार्केटिंग समय में और 1985 में आन्ध्रप्रदेश में पहली बार एफ सी वी तम्बाकू की बिक्री के लिए नीलामी पद्धति को प्रवेश किया गया ।

नीलामी पद्धति की विशेषताएँ
माँग के समतुल्य उत्पादन विधान

नीलामी पद्धति की प्रक्रिया के व्दारा बोर्ड, कुछ हद तक इन दिनों तम्बाकू उत्पादनको नियंत्रण में रखने की स्थिति में है, लेकिन इन दिनों काल्पनिक अत्याधिक उत्पादन में बढ़ती हुई रूचि का प्रमाण मिल रहा है।  क्षेत्र का पंजीकरण और तम्बाकू का कोटा, जो नीलामी मंच पर रखना है, को  मौसम के पहले ही तय हो जाता है, जो मिट्टी की प्रकृति, बखारों में क्यूरिंग क्षमता पर निर्भर करता है।  उत्पादकों को कडी सलाह दी जाती है, की अनुमोदित सीमा से अधिक तम्बाकू का उत्पादन न करें।  आबंटित तम्बाकू कोटा को, नीलामी मंच पर बेचने का प्राधिकरण उत्पादकों को दिया जाता है।  कोटा पद्धति सभी उत्पादकों को निश्चित अंतराल में तम्बाकू बेचने का अवसर प्रदान करता है।

सही वजन व्यवस्था और समय पर भुगतान

नीलामी से पूर्व तम्बाकू बेलों को उत्पादक के समक्ष ही वजन कराते हैं और उत्पादकों को वजन के अनुसार भुगतान दे दिया जाता है।  सही वजन औरअधिक स्पष्टता के लिए इलौक्ट्रानिक वजन मशीन स्थापित किए गये हैं।  यह पद्धति तम्बाकू बोर्ड व्दारा उत्पादकों के बेचे गये तम्बाकू के पूरा मूल्य में 15 दिन के पोस्ट डेटेड चेक के रूप में दे दिया जाता है ।

सही श्रेणी विभाजन और निष्पक्षपाती वर्गीकरण

सभी तम्बाकू उत्पादकों को चाहिए कि वे बिक्री से पूर्व अपने तम्बाकू को विशिष्ट श्रेणियों में / खेतों में पौधों के अनुसार विभाजित कर लें।  ग्रेडिंग नियमों के अनुसार सिर्फ सही श्रेणी के तम्बाकू बेलों को ही नीलामी मंच पर बिक्री के लिए रखे जा सकते हैं।  बुरे मिश्रित बेलों और कच्चे बेलों को अस्वीकार किया जाता है।  ग्रेडिंग और वर्गीकरण का कार्य बोर्ड के पदाािकारियों व्दारा बहुत कढ़ाई से ग्रेडिंग स्तरों और नियमों के आधार पर किया जाता है, जो नीलामी का आधार है ।

प्रथिस्पर्धा तत्व

इस पद्धति में, प्रतिस्पद्र्धा का तत्व उत्पन्न कर उत्पादकों को प्रतिदान मूल्य प्राप्ति का विश्वास दिलाया जाता है।  प्रत्येक प्लौटफॉर्म पर लगभग 25-30 क्रेता लोग नीलामी में भाग लेंगे, जो खरीदने वाले भी होंगे और तम्बाकू बेल के लिए बोली बोलने वाले भी।  बोर्ड के पदाधिकारी, तम्बाकू, की गुणता, विशेष किस्म की माँग और चालू बाजार दर इत्यादि को यान में रखते हुए आरंभिक दर को घोषणा करते हैं, जो अधिकतर, सरकार व्दारा निश्चित किए गए न्यूनतम समर्र्थन मूल्य से अधिक ही होता है।  आरंभिक मूल्य के आधार पर क्रेता प्रत्येक बेल पर बोली बोलता है और, अंतत: अत्यािक ऊँची बोली-बोलने वाले को यह बेल प्राप्त हो जाता है।  इस प्रतिस्पद्र्धा तत्व के कारण उत्पादकों को प्रतिदान मूल्य प्राप्ति का आश्वासन हो जाता है, जो तम्बाकू की गुणता और चालू माँग पर निर्भर करता है।  जब कभी भी एक ही मूल्य पर एक विशेष बेल के लिए, क्रेता अधिक होते हैं, तब लॉटरी के जरिये सफल बोली बोलने वाले को तय किया जाता है।  उत्पादकों को नीलामी में प्रस्तुत मूल्य को स्वीकृत अथवा अस्वीकृत करने का विकल्प की भी अनुमतित है ।

समर्थन मूल्य साधन 

इस पद्धति के अंतर्गत प्रत्येक श्रेणी के वी एफ सी तम्बाकू के लिए उत्पादक को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम एस पी ) का आश्वासन दिलाया जाता है। प्रति वर्ष बोआई मौसम आरंभ करने के समय से पहले एम एस पी की घोषणा की जाती है। जब बाजार में संकट की स्थिति पौदा होती है  तब न्यूनतम समर्र्थन मूल्यों की दरों में गिरावट होती है और तब तम्बाकू बोर्ड के व्यापार स्कंध को अधिकार दिया जाता है कि न्यूनतम समर्थन मूल्यों पर, जो कृषि की लागत और मूल्यों के कमीशन ( सी ए सी पी ) व्दारा सिफारिश आधार पर भारत सरकार व्दारा घोषित सामग्री खरीदें ।

न्यू.गा.मू. विचार

सरकार व्दारा कई  विषयों को यान में रखते हुए विभिन्न श्रेणियों के तम्बाकू का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया जाता है। जैसे कि, न्यू.गा.मू. साधारणत बाजार की दरों से कम ही होती है।  जौसा देखा गया है कि ट्रेड का झुकाव अधिकतर, समूचे तम्बाकू को एम एस पी से कुछ अधिक दरों में खरीदकर, किसानों को इस तरह स्पद्र्धा से हुए लाभों से वंचित करना है।  तमबकू बोर्ड इस परिस्थिति को रोकने के लिए असमर्थ है, क्योंकि जब तकसाधा रण मूल्य एम एस पी से अधिक है  तब तक व्यापार स्कंध बाजार मामलों में दखल नहीं कर सकता ।  इस समस्या के समाधान के लिए, बोर्ड ने, विचार किया कि ट्रेड के व्दारा एक ऐसा कमिटमेंट लिया जाय, जिससे उत्पादकों को न्यूनतम गारंटी मूल्य दिलाया जा सके।  वर्ष 1988 में कर्नाटका नीलामियों के दौरान बोर्ड, उत्पादकों और व्यापारियों से बातचीत कर पहली बार 14 रूपये प्रति कि ग्राम न्यूनतम गारंटी मूल्य निश्चित करने की घोषण की है।  इसके विरूद्ध, उस मौसम के लिए अंतिम औसत मूल्य 21.61 प्रति कि.ग्राम अंकित किया गया।  एम जी पी की यह पद्धतिआन्ध्रप्रदेश में, 1989 से प्रवेश करायी गयी ।

एम जी पी पद्धति अधिक प्रभावशाली होते हुए भी यह व्यापारियों और उत्पादकों  के बीच सिर्फ एक अनौपचारिक व्यवस्था है जिसका कोई सांवािक समर्थन नहीं है।  ट्रेड ने एम जी पी से सहमत होने की स्वीकृति दी बशर्तें कि वास्तविक उत्पादन, निश्चित किये गये फसल उत्पादन से 10% नहीं बढे और उत्पादित श्रेणी सामान्य हो।  वर्ष 1993 केआन्ध्रप्रदेश नीलामी में व्यापारियों ने काली मिट्टी के तम्बाकू होने के कारण उसे मान्यता नहीं दी और उस पर मूल्य अदायगी भी कम किया, जबकि उपज का उत्पादनअधिक था और इसपर रूस को निर्यात अनिश्चित था ।

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नीलामी प्लैटफार्म
आन्ध्र प्रदेश में नीलाम प्लैटफामों (मंच) का स्थान
प्रांत का नाम  मंच की कोड सं.मंच का स्थानजिल्ला
1 उत्तरी काली मिट्टीयाँ 19भद्राचलम खम्मम
215तोरेडु खम्मम
2        केन्द्रीय काली मिट्टीयाँ311कीसरा कृष्णा
3 दक्षिण काली मिट्टीयाँ 419वेल्लमपल्ली-1प्रकाशम
520ओंगोल-1प्रकाशम
623ओंगोल-2प्रकाशम
724टंगुटूर प्रकाशम
825कोंडेपी प्रकाशम
931वेल्लमपल्ली-2प्रकाशम
4 दक्षिण काली मिट्टीयाँ 1021पोदिली-1प्रकाशम
1122पोदिली-1प्रकाशम
1226कन्दुकूर-1 प्रकाशम
1327कन्दुकूर-2प्रकाशम
1428कलिगिरीप्रकाशम
1529डी.सी.पल्लीप्रकाशम
5 उत्तरी काली मिट्टीयाँ 1617देवरपल्लीपश्चिम गोदावरी
1718जे.आर.गुडेम -1पश्चिम गोदावरी
1830कोय्यलगुडेमपश्चिम गोदावरी
1932जे.आर.गुडेम -2पश्चिम गोदावरी
2033गोपालपुरम पश्चिम गोदावरी
कर्नाटका में नीलामी प्लैटफार्मों (मंच ) का स्थान
क्र.सं. प्लैटफार्म का कोड सं.मंच का स्थानजिल्ला
1.1हेच.डी.कोटेमैसूर
2.2हुन्सूर - Iमैसूर
3.3हुन्सूर - II मैसूर
4.4पेरियपट्ना - I मैसूर
5.5पेरियपट्ना -II मैसूर
6.6पेरियपट्ना -IIII मैसूर
7.7रामनाथपुरा - Iहस्सन
8.61कम्पलापुरा - Iमैसूर
9.62कम्पलापुरा - IIमैसूर
10.63रामनाथपुरा - IIहस्सन

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नीलाम कार्यविधि
नीलामी प्लैटफॉर्म:

भारतीय अवस्थाओं में, तम्बाकू का सही परिमाण, जो नीलामी प्लैटफॉर्म पर हैडल किया जाना है, वह है 5 से 6 मि.कि ग्राम।  नीलामी प्लैटफार्मों की स्थापना उत्पादक क्षेत्र के समीप किया जाता है,  जिसमें 50 से 100 ग्रामों को भी सम्मितिल किया जाता है, जिनके पास लगभग एक ही किस्म की मिट्टी के तम्बाकू का उत्पादन है।  प्रत्येक प्लैटफॉर्म लगभग 2500 उत्पादकों का देख-रेख करता है। प्रत्येक समूह (क्लस्टर) में उत्पादकों और क्यूरिंग इकाईयों (बखारों ) की संख्या कम या ज्यादा लगभग समान होती है। प्रत्येक नीलामी प्लैटफॉर्म अंतर्गत लगभग 10 समूह होंगे, जिनमें से प्रत्येक समूह में लगभग 250-300 तक उत्पादक रहेंगे।

क्लस्टरवार बिक्री की तारीखें:

में उत्पादकों और क्यूरिंग इकाईयों (बखारों ) की संख्या कम या ज्यादा लगभग समान होती है। प्रत्येक नीलामी प्लैटफॉर्म अंतर्गत लगभग 10 समूह होंगे, जिनमें से प्रत्येक समूह में लगभग 250-300 तक उत्पादक रहेंगे। उत्पादकों को यह अनुमति दी जाती है कि वे अपने तम्बाकू की बिक्री, समूहों के क्रमानुसार एक के बाद दूसरे समूह में निश्चित तिथियों में, कर सके, जिससे सभी उत्पादकों को समान रूप से बेचने का अवसर मिलता है। समूचे उत्पादन की बिक्री 6 से 7 बिक्री चक्करों में समाप्त। हो जायेगी ।

वजन:

जैसे ही बेल प्लैटफॉर्म पर भेज दिया जाता है, प्रत्येक बेल पर लाट संख्या अंकित की जाती है। फिर उत्पादक के समक्ष इसे तौल कर, उत्पादकों को उत्पाद सौंपने का एक रसीद दी जाती है। इस रसीद में प्रत्येक बेल को दी गई लाट संख्या और वजन का विवरण निहित रहेगा। वजन की प्रक्रिया सुबह आरंभ होती है। वजन में अधिक स्पष्टता और सही वजन के लिए एलेक्ट्रोनिक वजन पौमानों की स्थापना की गई है तथा रसीदें कम्प्यूटर व्दारा जनरेट किया जाता है।

प्लैटफॉर्म पर बेलों की व्यवस्था:

जैसे ही बेल प्लैटफॉर्म पर भेज दिया जाता है, प्रत्येक बेल पर लाट संख्या अंकित की जाती है। फिर उत्पादक के समक्ष इसे तौल कर, उत्पादकों को उत्पाद सौंपने का एक रसीद दी जाती है। इस रसीद में प्रत्येक बेल को दी गई लाट संख्या और वजन का विवरण निहित रहेगा। वजन की प्रक्रिया सुबह आरंभ होती है। वजन में अधिक स्पष्टता और सही वजन के लिए एलेक्ट्रोनिक वजन पौमानों की स्थापना की गई है तथा रसीदें कम्प्यूटर व्दारा जनरेट किया जाता है।

तम्बाकू का वर्गीकरण:

नीलामी प्लैटफॉर्म पर बेलों को व्यवस्थित करने को बाद, तम्बाकू बोर्ड के वर्गीकारक, बेलों को खोलकर 2 या 3 जगहों से नमूनों को लेते हैं और उन्हें वर्गीकृत करते हैं।  लिये गये नमूनो को भी बेलों के ऊपर प्रदर्शित किया जाता है। वरिष्ठ श्रेणी अधिकारी या नीलामी अधीक्षक के अलावा, एक बार श्रेणी अंकित करने के बाद, उसे परिवर्त्तित नहीं किया जायेगा ।

क्रेताओं का प्राधिकरण:

बोर्ड, प्रति वर्ष खरीददारों को प्राधिकरण प्रदान करता है, जो नीलामी प्लैटफॉर्म (मंचों ) पर तम्बाकू खरीदना / संचालन करना चाहतें हैं। प्राधिकृत खरीददारों को नीलामी प्लौटफार्म से खरीदने की अनुमति तब दी जाती है, जब वे बैंक गारंटी को प्रस्तुत करते हैं या बैंक से स्थाई अनुदेश पत्र (एल एस आई) प्राप्त करते हैं या बैंक ड्राफ्ट से अग्रिम भुगतान करते हैं ।

बोली - बोलना:

दी गई संख्या के अनुसार, बोलों की नीलामी, बेल-दर-बेल की जाती हैं । क्रेता एक बार अपना स्थान ले लेने के बाद बोर्ड का स्टार्टर उस समय लगाये श्रेणी और मूल्य की घोषणा करता है । आरंभिक मूल्य तय करने के लिए निर्देशित घटक है, तम्बाकू की श्रेणी, गुणता, उस किस्म, या श्रेणी के तम्बाकू का चालू दर । बोली 20 पौसे प्रति कि.ग्राम से कम नहीं होती हैं जब तक बेल ऊँची बोली वाले को हासिल नहीं हो जाता ।

बेबोली (की अनुपस्थिति):

स्टार्टर के द्वारा एक बार प्रारंभिक मूल्य की घोषणा के बाद अगर कोई खरीददार बोली नहीं बोलता है, तब स्टार्टर, प्रारंभिक मूल्य को अपने मन चाहे स्तर में उस सीमा तक कम कर सकता हैं, जिससे दी गयी बाजार स्थिति में बेल को कुछ प्राप्त हो । इतना होते हुए भी अगर बोली नहीं बोली जाती है तब स्टार्टर बेल को बिक्री से हटा देता है, इस तरह के बेल की बिक्री दूसरे किसी दिन बिक्री के लिए रखे जाते हैं ।

उत्पादकों द्वारा अस्वीकरण:

बोली के बाद उत्पादकों को इस पद्धति में एक वौकल्प दिया जाता हैं, बेल के लिए दी गयी दर से अगर संतुष्टी न हो तो उसे अस्वीकार कर सके और उसे पुन: बिक्री के लिए रख दें ।

क्रेताओं द्वारा अस्वीकार:

बिक्री की समाप्ति के बाद, अगर क्रेता को यह पता लगता है कि खरीदा हुआ बेल बहुत बुरी तरह से व्यवहृत किया गया, घुमा हुआ, दुर्गन से भरा हुआ या नष्ट हुआ या किसी दूसरी तरह से बिक्री के लिए सही नहीं है और ऐसा निरुपण वर्गीकरण द्वारा बेल टिकट पर अंकित नहीं किया गया है और यह स्टार्टर द्वारा घोषित किया गया हो, तब क्रेता बिक्री को अस्वीकार कर सकता है और इसकी सूचना उच्च वर्गीकरणकर्ता (व श्रे अ) को दे सकता है। उच्च वर्गीकरणकर्ता (व श्रे अ) इस विषय में सूक्ष्म निरीक्षण कर या तो विवाद को जारी करता है या तिरस्कृत करता है । किसी भी परिस्थिति में बेल टिकट पर कारण अंकित करते हुए, अगर विवाद उच्च वर्गीकरणकर्ता (व श्रे अ) द्वारा जारी रखा जाता हैं तब उत्पादक को, बेल फिर से प्रस्तुत करने के लिए लौटा दिया जाता हैं । अगर उच्च वर्गीकरणकर्ता (व श्रे अ) के विवाद को बनाये नहीं रखते हैं, तब बिक्री जारी रहती है।

क्रेताओं व्दारा बेलों का निष्कासन:

बोली के बाद, खरीदे हुए बेल, क्रेताओं को सौंप दिये जाते हैं। अगर क्रेता दिये गए समय से अधिक अवधि  तक बेलों को नहीं ले जाता तब बोर्ड उस पर दण्ड शुल्क लगाता है।

भुगतान :

क्रेताओं से अनुरोध किया जाता है कि बीजक मूल्य उत्तर तिथियों के चौकों व्दारा 10 दिन में बोर्ड को अदा करें। बोर्ड, नीलामी तारीख से, कर्नाटका तथा आन्ध्र प्रदेश दोनों में, 15 दिन के उत्तर तिथियों के चौकों, जो बैंक (जिससे ग्रोयर खाता का रखरखाव करता है ) के पक्ष आहरित हो, व्दारा ग्रोयरों को अदायगी करने की व्यवस्था करता है।

सेवा प्रभार और उपकर:

बोर्ड, उत्पादकों और क्रेताओं से बेचे गये तम्बाकू के मूल्य पर 1% दर पर सेवा प्रभार और प्रति किग्रा के लिए 1 पौसें दर पर उपकर (उत्पाद शुल्क ) उत्पादक से, वसूल करता है ।

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क्रेताओं का भाग लेना

नीलामी प्लैटफॉर्म पर भाग लेकर तम्बाकू खरीदने के लिए क्रेता ( तम्बाकू व्यापारी ) को तम्बाकू बोर्ड से एक प्राधिकरण पत्र लेना आवश्यक है। (तम्बाकू बोर्ड के (नीलामी ) नियमों का नियम 5 )।

प्राधिकारण की प्रक्रिया:

(तम्बाकू बोर्ड नीलामी विनियम के विनियम (13) के अधीन )

Aजो व्यक्ति नीलामी प्लैटफॉर्म पर क्रेता के रूप में संचालन करना चाहता है उसे चाहिए कि वह प्रपत्र VII में निर्धारित अवधि के अंदर नीलामी निदेशक को आवेदन करें। क्रेता के रूप में रहना चाहने वाले व्यक्ति अगले विवरण के लिए गुण्टूर, ओंगोल, राजमहेन्द्री और मौसूर में रहे तम्बाकू बोर्ड के प्रादेशिक प्रबंधकों से संपर्क करें।

आवेदक को, इन विवरणों को प्रस्तुत करना होगा-प्लौटफार्म का नाम, जिसका संचलन करना चाहते हैं, पता, पिछले तीन वर्षों में की गई खरीदी, आवेदक के स्थान पर आने वाले प्राधिकृत प्राप्त व्यक्ति का नाम और हस्ताक्षर और स्थान, जहाँ तम्बाकू का संग्रह किया जायेगा।

प्रत्येक प्लैटफॉर्म के लिए अलग आवेदन देना आवश्यक है। आवेदन के साथ पंजीकरण प्रमाण पत्र की एक प्रतिलिपि जो डीलर/निर्यातक/पौकर के रूप में तम्बाकू बोर्ड व्दारा जारी किया गया है और प्रत्येक प्लैटफॉर्म के लिए 500/-रूपये का शुल्क। क्रेता के प्राधिकारण के लिए आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तारीख कर्नाटका के विषय में 30 जून और आन्ध्र प्रदेश के विषय में 15 जनवरी है।

आवेदन प्राप्ति के बाद नीलामी निदेशक प्रपत्र-VIII उन सब को प्राािकरण जारी करते हैं, जो उपर्युक्त आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं, और जिनका तम्बाकू बोर्ड को कोई देय नहीं है और जो अधिनियम/नियम/विनियम के अधीन विषयों के विरूद्ध के साथ जाकर किसी प्रकार का अपराध न किया हो।

एक बार प्रदान किया गया प्राधिकारण, कैलेण्डर वर्ष के अंत तक लागू रहेगा (नीलाम विनियम 13(5) सी विनियम के अनुसार)

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उपलब्धियाँ
  • उत्पादकों के शोषण को अत्याधि हिस्सों में दूर करते हुए आंतरिक बाजार व्यवस्था को एक रास्ते पर लाया गया।
  • इस पद्धति, से खरीददारों के बीच एक प्रतिस्पर्धा की भावना उत्पन्न हुई, जो परंपरागत बाजार पद्धति में नहीं पायी गयी।
  • यह पद्धति, उत्पादकों को एक स्थाई एम एस पी का सुनिश्चित करती है।
  • इस पद्धति में किसान अपने उत्पाद को उचित अवधि के अदंर बेचकर दूर कर सकते हैं।
  • उत्पादक-बेचनेवाले अच्छी आमदनी प्राप्त करने के साथ-साथ समय पर भुगतान का भी अतिरिक्त लाभ उठा सकते हैं।
  • ग्रेडिंग पद्धति का सुधार खेत-स्तर पर ही किया गया है, जो उत्पादकों और व्यापारियों को लाभकारी सिद्ध हुआ है।
  • खरीददारों की व्यवस्था संबंधी खर्चे जौसे सुनियोजन, रख-रखाव और अतिरिक्त खर्चों में अत्यंत कम पाई गई है।

तम्बाकू के विभिन्न श्रेणियों के लिए बिक्री के मूल्यों में अंतर और तम्बाकू के किस्मों ने गुणता और मूल्यों के बीच संबंध स्थापित करने की सहायता दी, जो उत्पादकों के बीच गुणता की भावना कायम करना आरंभ किया।

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एफ सी वी तम्बाकू के लिए इलेक्ट्रानिक नीलाम पद्धति का परिचय:

तम्बाकू बोर्ड ने, एफ सी वी तम्बाकू के विपणन के लिए नीलाम पद्धति में पारदर्शिता लाने, ताकि ट्रेड कार्टल, उच्चतम मूल्य, बेलों को आबंटन में विभेदिकरण, नीलाम विवरणों को रिकार्डिंग आदि समस्याओं को हल करने इलेक्ट्रानिक नीलाम पद्धति का परिचय करने का प्रस्ताव की है ।

मेसर्स. क्रेन्स साफ्टवेयर इंन्टरनेशनल लिमिटेड, बेंगलूर, जो एक सी एम एम लेवल और अंप्रसं 9001 से प्रमाणित कंपेनी है, को जे.आर.गुडेम-II नीलाम प्लौटफार्म में इ-आक्शन पौलेट परियोजना का कार्यान्वयन का कार्य प्रदान की गई है ।

The इ-आक्शन पौलेट परियोजना दि.29-मई-2008 को जे.आर.गुडेम-II नीलाम प्लैटफॉर्म में प्रारंभ हुआ था और विपणन मौसम याने 2 जुलाई, 08 तक जारी रहा था । यह इ.आक्शन पद्धति का परिणाम अच्छा रहा । तम्बाकू उद्योग के मुख्य पणाधारियों याने, किसान और क्रेता इस नयी पद्धति का अच्छा स्वागत किये थे।

जे.आर.गुडेम में जून, 2008 महीने में कुछ सीमित अवधि के लिए यह पौलेट परियोजना जे.आर. गुडेम में चलाने के कारण बोर्ड ने इसे 2008 नीलाम मौसम में कर्नाटका के हुन्सूर-II नीलाम प्लैटफॉर्म में पूर्ण विकसित पैलेट परियोजना के रुप में कार्यान्वित किया और दि.09 नवंबर, 2008 को वाणिज्य एवं पॉवर राज्य मंत्री श्री जय राम रमेश के करकमलों द्वारा इसका उद्घाटन हुआ था । यह इ-आक्शन कर्नाटका के हुन्सूर-2 नीलाम प्लैटफॉर्म में निर्विघ्न चल रहा है और यह विपणन मौसम समापन होने तक जारी रहेगा ।

इलेक्ट्रानिक नीलाम पद्धति से लाभ:
  • क्रेता लोग, उनके एचएचटी में, जो बिडिं्डग प्रोसेस में सहायता करेगा, में श्रेणी, गुणता, प्रारंभिक मूल्य आदि पर उनके अभ्युक्तियों को यान में रखने के द्वारा पूर्व-नीलाम में अपने क्रय क्षमता के अनुसार योजना बनायेगा ।
  • चाँटर की भूमिका एलिमिनेट किया जायेगा ।
  • एफ-5 का हस्त-लेखन विथड्रा किया जायेगा ।
  • उच्चतम मूल्य का प्रश्न नहीं उठेगा  ।
  • क्रेताओं को उनके बीजी सीमाओं के बीतर ही बिड करने के लिए सीमित किया जायेगा ।
  • क्रेताओं को, उनके एचएचटी में से, जो उनके स्मार्ट कार्डोंे, यदि उपलब कराया गया है तो, को डाऊनलोड किया जा सकता है, से भी बेलों की पूर्ण आँकडे प्राप्त करेंगे ।
  • यह पद्धति बिद्दींग प्रोसेस में पूर्णरुप से पारदर्शक रहा है और ग्रोयरों का रजिस्ट्रेशन, पेमेंट पद्धति को सरल बनाया और नीलाम पद्धति का समग्र क्षमता का बढावा है ।


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